इलाहाबाद हेरिटेज वॉक


इलाहाबाद को एक ज़माने में प्रयाग यानी "यज्ञों के स्थल" से जाना जाता था। यह गंगा, यमुना व कल्पित नदी सरस्वती के संगम पर स्थित है। मुगल सम्राट अकबर ने इसका नाम परिवर्तित करके इलाहबाद कर दिया जिसका अर्थ होता है "परमेश्वर की नगरी" जो बाद में अंग्रेजों द्वारा इलाहाबाद में परिवर्तित कर दिया गया। एक ज़माने में इसे प्रधान मंत्रियों के शहर के नाम से भी जाना जाता था।


  • हेरिटेज वॉक के जरिये इलाहाबाद को जानिए

    Allahabad Heritage Walk

    संगम शहर के एक निर्देशित दौरा का प्रारंभ 27 सितंबर, 2017 से प्रातः 6:00 बजे के उपरांत से हो रहा है जिसका निर्धारित मार्ग इस प्रकार है अल्फ्रेड पार्क (चन्द्र शेखर आज़ाद पार्क) से प्रारंभ होकर, इलाहाबाद संग्रहालय, थॉर्नहिल मेन मेमोरियल, विक्टोरिया मेमोरियल, म्योर सेंट्रल कॉलेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गणित विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का वनस्पति विज्ञान विभाग, विश्वविद्यालय रोड, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्राचीन इतिहास विभाग, केंद्रीय पुस्तकालय, सीनेट हॉल, के.पी.यू.सी, बेलवेडियर प्रिंटिंग वर्क्स, होली ट्रिनिटी चर्च, जवाहर बाल भवन, स्वराज भवन, आनंद भवन एवं भारद्वाज आश्रम तक होगा।

  • प्रारंभ स्थान: अल्फ्रेड पार्क (चन्द्र शेखर आज़ाद पार्क)

    Allahabad Heritage Walk

    वर्ष 1870 में सक्स-कोबर्ग के राजकुमार अल्फ्रेड एवं गोथा इलाहाबाद के दौरे पर आए थे। इस दौरे के स्मरण चिन्ह के रूप में 133 एकड़ भूमि पर इस पार्क का निर्माण किया गया जो शहर के अंग्रेजी क्वार्टर, सिविल लाइन्स के केंद्र में स्थित है। वर्ष 1931 में इसी पार्क में क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी चन्द्र शेखर आज़ाद को अंग्रेज़ों द्वारा एक भयंकर गोलीबारी में वीरगति प्राप्त हुई। आज़ाद की मृत्यु 27 फ़रवरी 1931 में 24 साल की उम्र में हो गई।

  • इलाहाबाद संग्रहालय

    Allahabad Heritage Walk

    इलाहाबाद संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1863 में हुई थी और यह भारत के पहले सार्वजनिक संग्रहालयों में से एक है। संग्रहालय में अठारह गैलरी हैं जो भारतीय इतिहास के विकास को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। इस संग्रहालय में ए.के हल्दार की मूर्तियां, चन्द्र शेखर आजाद की पिस्तौल, पीतल की कास्केट जिसमें महात्मा गांधी की अस्थियाँ संगम तक लाई गई थीं, महात्मा गांधी द्वारा डांडी में बनाया गया नमक, कौसाम्बी और मोहनजोडारो से संबंधित छह हजार से ज्यादा मूर्तियों का संग्रह तथा प्रागैतिहासिक रॉक आर्ट का सबसे विशाल संग्रह मौजूद है।

  • थॉर्नहिल मेन मेमोरियल

    Allahabad Heritage Walk

    इलाहाबाद लोक पुस्तकालय की स्थापना उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती प्रांतों की सरकार द्वारा की गई थी। वर्तमान में, राजकीय लोक पुस्तकालय थॉर्नहिल मेन मेमोरियल भवन में स्थित है। इसे सी.बी. थॉर्नहिल और एफ.ओ मेन की याद में बनाया गया था, उनकी अटूट मित्रता एवं उनकी विद्वता के मूल्यों को समाज को इसके द्वारा दर्शाया गया है।

    इस पुस्तकालय में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, बांग्ला और फ्रेंच में पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, राजपत्रों और अन्य पढ़ने योग्य सामग्री की विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। कुछ उल्लेखनीय पुस्तकों में मज़्म-उल-बहरीन, फिरदौसी का शाहनामा , ज्योतिष-शास्त्र एवं गणेश पुराण शामिल हैं।

  • विक्टोरिया मेमोरियल

    Allahabad Heritage Walk

    इतालवी चूना पत्थर से विशाल कैनोपी के रूप में निर्मित विक्टोरिया मेमोरियल रानी विक्टोरिया की याद में बनवाया गया था। इसका लोकार्पण 24 मार्च 1906 में जेम्स दिग्ज लाटूश द्वारा किया गया था। यहाँ पर एक ज़माने में रानी विक्टोरिया की एक विशाल प्रतिमा स्थापित थी जो बाद में हटा दी गई।

  • म्योर सेंट्रल कॉलेज

    Allahabad Heritage Walk

    इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना 23 सितंबर, 1887 में हुई थी तथा यह भारत के चौथे सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। यह संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर, सर विलियम म्योर की देख-रेख में स्थापित किया गया था व भवन का सर विलियम एमर्सन द्वारा डिजाइन किया गया था। इस विश्वविद्यालय की वास्तुकला में मिस्र, इंग्लैंड और भारत वास्तु तत्वों के अंश देखे जा सकते हैं।

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गणित विभाग

    Allahabad Heritage Walk

    वर्ष 1872 में स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गणित विभाग भारत में शिक्षा के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक है। यह विभाग एक दो मंजिला गॉथिक शैली में निर्मित भवन में मौजूद है जिसकी वास्तुकला में ठेठ इलाहाबादी मेहराब एवं छाया-आकृति देखी जा सकती हैं। इसकी कक्षाओं में ऊँची गुबंद देखी जा सकती हैं तथा दीवार से छत तक पाठ्यपुस्तकों को देखा जा सकता है। विश्वविद्यालय के “पूर्व के ऑक्सफ़ोर्ड” होने के दावे को विभाग स्पष्ट रूप से दर्शाता है। बीजगणित, तरल यांत्रिकी, रेखागणित एवं गणितीय पारिस्थितिकी के कई विश्व प्रसिद्ध विद्वान यहीं से उभरे हैं।

  • वनस्पति विज्ञान विभाग

    Allahabad Heritage Walk

    वनस्पति विज्ञान विभाग एक औपनिवेशिक युग के भवन में स्थित है जिसकी वास्तुकला में भारत-इस्लामिक शैली के साथ शास्त्रीय समरूपता देखी जा सकती है। यह वर्ष 1923 में स्थापित हुई थी तथा यह चारों ओर से खजूर के पेड़ों से घिरा हुआ है। यह भारत के सबसे पुराने वनस्पति विज्ञान विभागों में से एक है।

  • विश्वविद्यालय रोड

    Allahabad Heritage Walk

    कर्नलगंज के समीप कटरा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कला और विज्ञान संकायों के बीच एक गली के रूप में विश्वविद्यालय रोड स्थित है। इस मार्ग की यात्रा के जरिये विश्वविद्यालय के छात्रों के जीवन की यात्रा का अनुभव किया जा सकता है। यहाँ पर ढेरों फुटपाथ विक्रेता देखे जा सकते हैं जो रोजमर्रा के अनेक पदार्थ विक्रय करते हैं। यहाँ विक्रय होने वाले पदार्थों में स्टेशनरी से लेकर भोजन एवं दैनिक जरूरत की वस्तुएं शामिल हैं। इस स्थान के बारे में दिलचस्प तथ्य यह है कि यहाँ किताबें किलोग्राम में बेची जाती हैं।

  • प्राचीन इतिहास विभाग

    Allahabad Heritage Walk

    इस विभाग ने भारतीय प्रागितिहास, धर्म, दर्शनशास्र, पुरातत्त्व एवं मनुष्य जाति के विज्ञान के अध्ययन में बेहद योगदान दिया है। यह प्रोफेसर जी.आर. शर्मा की देख-रेख में स्थापित किया था जिन्होंने पुरातात्विक महत्व की व्यापक खुदाई परियोजनाएं की शुरुआत करी। विभाग द्वारा गंगा घाटी के इतिहास पर प्रकाश डाला गया। जी.आर शर्मा मेमोरियल संग्रहालय में विभाग द्वारा की गई प्राचीन वस्तुओं की खोज संग्रहित है।

  • केंद्रीय पुस्तकालय

    Allahabad Heritage Walk

    स्कॉटिश, बरोनियल, अवधी, मुगल एवं ब्रिटिश वास्तुकला शैली के मिश्रण से केंद्रीय पुस्तकालय का निर्माण किया गया है जिसके वास्तुकार सर स्विन्टन जैकब थे। वर्तमान संरचना का निर्माण वर्ष 1973 में किया गया था। पुस्तकालय के सामने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की एक प्रतिमा स्थापित है जो हिन्दी साहित्य के एक प्रख्यापित हस्ती हैं।

  • सीनेट हॉल

    Allahabad Heritage Walk

    सीनेट हॉल का निर्माण सर स्विन्टन जैकब द्वारा वर्ष 1910-1915 में कराया गया था। यह अनेक छतरी एवं झरोखों द्वारा सजा हुआ है साथ ही इसमें ठेठ इलाहाबादी मेहराब देखे जा सकते हैं।

  • के.पी.यू.सी

    Allahabad Heritage Walk

    यह महाविद्यालय वर्ष 1951 में स्थापित हुआ था। यह कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट द्वारा अनुरक्षित है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ग्यारह घटक और चौदह हॉस्टल कॉलेज हैं।

  • बेलवेडियर प्रिंटिंग वर्क्स

    Allahabad Heritage Walk

    बेलवेडियर प्रिंटिंग वर्क्स की स्थापना बाबू बालेश्वर प्रसाद द्वारा वर्ष 1876 में हुई थी। उस समय में यह इलाहाबाद की एकमात्र प्रिंटिंग प्रैस थी। यह प्रिंटिंग प्रैस एक प्रख्यापित अख़बार “दि पायनियर” (सबसे पुराने अखबारों में से एक) की छपाई के लिए जानी जाती है। यहाँ पर रुडयार्ड किपलिंग ने सहायक संपादक की तरह काम किया था तथा उन्होने बेलवेडियर हाउस में 1888-89 के दौरान निवास भी किया था।

  • होली ट्रिनिटी चर्च

    Allahabad Heritage Walk

    होली ट्रिनिटी चर्च इलाहाबाद में स्थित सभी चर्च में से सबसे पुराना चर्च है जो वर्ष 1939 में लेफ्टिनेंट शार्प द्वारा बनवाया गया था। इसकी परिकल्पना मेजर स्मिथ ने औपनिवेशिक गॉथिक वास्तुकला शैली में की थी तथा यह आठ स्तंभों पर खड़ा है। इस भवन में ग्वालियर अभियान व 1857 के विद्रोह के सभी स्मारक संग्रह किए गए हैं।

  • जवाहर बाल भवन

    Allahabad Heritage Walk

    स्वराज भवन से ही बाल भवन संचालित होता है। इसकी स्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने की थी क्योंकि उन्हे ऐसा लगता था कि बाल भवन द्वारा राष्ट्र के छात्रों की क्षमताओं को उचित उपयोग में लाया जा सकता है। बाल भवन छात्रों को भविष्य में रचनात्मक विचारक, दयालु और जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करता है जिससे वह समाज के लिए योगदान कर सकें।

  • स्वराज भवन

    Allahabad Heritage Walk

    आनंद भवन के परिसर में स्थित स्वराज भवन मोतीलाल नेहरू जी की राजसी हवेली है। यह नेहरू परिवार का पैतृक घर है जहाँ प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी का जन्म हुआ था। वर्ष 1920 में मोतीलाल नेहरू जी ने इस भवन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को दानस्वरूप दे दिया था। इसका स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को परिभाषित करने वाले कई महत्वपूर्ण आंदोलनों के लांच पैड के रूप में इस्तेमाल किया गया था तभी इसे स्वराज भवन के नाम से जाना जाता है।

  • आनंद भवन

    Allahabad Heritage Walk

    आनंद भवन इलाहाबाद का एक ऐतिहासिक भवन संग्रहालय है जो नेहरू परिवार का हुआ करता था। इसका निर्माण मोतीलाल नेहरू जी द्वारा वर्ष 1930 में कराया गया था जो नेहरू परिवार के निवास स्थान की तरह उपयोग होता था। परंतु बाद में इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा उनके स्थानीय मुख्यालय यानी स्वराज भवन में परिवर्तित कर दिया गया। इसमें जवाहर नक्षत्रशाला भी स्थित है।

  • भारद्वाज आश्रम

    Allahabad Heritage Walk

    यह एक धार्मिक स्थान है जो ऋषि भारद्वाज के साथ संबंधित माना जाता है। ऋषि भारद्वाज के समय में यह एक महत्वपूर्ण शैक्षिक केंद्र के रूप में प्रख्यापित था। ऐसी मान्यता है कि वनवास में जाने से पहले भगवान राम अपनी पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ यहाँ पर आए थे।

उ. प्र. पर्यटन से जुड़ें   #uptourism   #heritagearc
अंतिम नवीनीकृत तिथि : गुरुवार, Sep 28 2017 11:59AM