लोग, भाषा और संस्कृति

लोग

उत्तर प्रदेश में बहुसंख्यक समाज हिंदू धर्म को मानने वाला है,तो अल्पसंख्यकों में सबसे ज्यादा प्रतिशत इस्लाम को मानने वालों का है। हालांकि राज्य में सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई भी अच्छी-खासी संख्या में मौजूद हैं।



भाषा

उत्तर प्रदेश में प्रमुख तौर पर हिंदी, उर्दू, अवधी, ब्रज ,भोजपुरी, बुंदेलखंडी और इंग्लिश बोली जाती है।



संस्कृति

किसी भी समाज की रोज़मर्रा की जिंदगी में उसकी संस्कृति रच-बस जाती है। यानी उस समाज में रहने वालों का एक-दूसरे के प्रति रवैया, उनका परस्पर व्यवहार, आदतें और वे किस तरह जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आनंद लेते हैं। इसमें कला और उसके जरिए अपनी भावनाओं और संस्कृति का प्रदर्शन भी शामिल है।

इस लिहाज़ से भी देखें तो उत्तर प्रदेश ने रामायण और महाभारत के रूप में दो महान महाकाव्य दिए हैं। उस दौर से ही उत्तर प्रदेश को संस्कृतियों की नई-नई धाराएं सींचती आई हैं। बाद के दौर में भी बुद्ध और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की शिक्षाओं के रूप में दो नई संस्कृतियां यूपी की धरती पर पुष्पित-पल्लवित हुईं।

पांडित्य यानि ब्राह्मण संस्कृति के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयाग, मथुरा और हिमालय के आश्रम रहे हैं। मथुरा अगर प्राचीन पांडित्य और बौद्ध कला-संस्कृति की प्रश्रय स्थली रहा, तो काशी विशुद्ध रूप से हिंदू जीवन शैली और संस्कृति का गढ़।

यहां के लोग अलग-अलग धर्मों का प्रतिनिधित्व करते थे और देश के दूर-दूर के इलाकों से आए थे। यह अलग और महत्वपूर्ण बात है कि उन सभी ने परस्पर मिलकर अपनी एक नई संस्कृति विकसित की। अफगान, कश्मीरी, बंगाली, पारसी और पंजाबी यहां आए और बस गए। ईसाई, हिंदू, मुस्लिम और बौद्ध धर्मावलंबियों को अपने धर्म और मान्यताओं के अनुरूप जीवन जीने की आजादी यहां मिली। यह आजादी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।

एक तरफ जहां यह प्रदेश पंथनिरपेक्ष, उदार और प्रगतिशील है, वहीं दूसरी तरफ अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपराओं से भी ही उतनी गहराई से जुड़ा है।



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अंतिम नवीनीकृत तिथि : गुरुवार, Sep 10 2015 4:01PM