रॉक पेंटिंग (भित्ति चित्र)
"उत्तर प्रदेश में चित्रकारी की परंपरा या कहें कि जड़ें प्रागैतिहासिक काल में भी मिलती हैं। सोनभद्र और चित्रकूट में मिली गुफाओं की दीवारों पर शिकार, युद्ध, त्योहार, नृत्य-संगीत, श्रृंगार रस और जानवरों के उकेरे हुए चित्र मिले थें।"

वैसे यूपी में चित्रकारी का स्वर्णिम काल मुग़ल दौर कहा जा सकता है, खासकर जहांगीर के शासन काल में चित्रकारी की कला ने नए आयाम छुए। यही वजह है कि मुग़ल शैली की चित्रकारी एशियाई संस्कृति की खास उपलब्धि मानी जाती है। विचार, प्रस्तुति और स्टाइल में इस शैली का कोई जोड़ नहीं है।

मथुरा में ओरछा के राजा ने जब केशव देव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, तो उस वक्त बुंदेलखंड क्षेत्र में चित्रकारी बतौर कला अपने शिखर और पूर्णता पर थी। मथुरा, गोकुल, वृंदावन और गोवर्धन में चित्रकारी के जरिए भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को जीवंत किया गया है।

चित्रकारी के आधुनिक दौर से पहले एक और शैली अस्तित्व में आई, जिसे गढ़वाली कला का नाम दिया गया। इस शैली को गढ़वाल के राजा ने न सिर्फ प्रश्रय दिया, बल्कि फलने-फूलने के तमाम अवसर भी उपलब्ध कराएं।

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अंतिम नवीनीकृत तिथि : सोमवार, Jan 23 2017 2:08PM