संस्कृति

किसी भी समाज की रोज़मर्रा की जिंदगी में उसकी संस्कृति रच-बस जाती है। संस्कृति का अर्थ है उस समाज में रहने वालों का एक-दूसरे के प्रति रवैया, उनका परस्पर व्यवहार, आदतें और वे किस तरह जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आनंद लेते हैं। इसमें कला और उसके जरिए अपनी भावनाओं और संस्कृति का प्रदर्शन भी शामिल है।

उत्तर प्रदेश ने समाज को दो अनमोल रत्नों से नवाज है, अर्थात दो महाकाव्य, रामायण और महाभारत। प्राचीन काल से ही उत्तर प्रदेश को संस्कृतियों की नई-नई धाराएं सींचती आई हैं। बाद के दौर में भी बुद्ध और 24वें जैन तीर्थंकर महावीर की शिक्षाओं के रूप में दो नई संस्कृतियां यूपी की धरती पर पुष्पित-पल्लवित हुई हैं।

हमेशा से काशी, अयोध्या, प्रयाग, मथुरा और हिमालय पांडित्य यानि ब्राह्मण संस्कृति के केंद्र के आश्रम रहे हैं। मथुरा अगर प्राचीन पांडित्य और बौद्ध कला-संस्कृति की प्रश्रय स्थली रहा है, तो काशी विशुद्ध रूप से हिन्दू जीवन शैली और संस्कृति का गढ़।

देश के दूर-दूर के इलाकों से आए लोग यहां अलग-अलग धर्मों का प्रतिनिधित्व किया करते थें। यह अलग और महत्वपूर्ण बात है कि उन सभी ने परस्पर मिलकर अपनी एक नई संस्कृति विकसित की। अफगान, कश्मीरी, बंगाली, पारसी और पंजाबी यहां आएं और बस गयें। यहां ईसाई, हिन्दू, मुस्लिम और बौद्ध धर्मावलंबियों को अपने धर्म और मान्यताओं के अनुरूप जीवन जीने की आजादी मिली। यह आजादी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी कायम है।

एक तरफ जहां यह प्रदेश पंथनिरपेक्ष, उदार और प्रगतिशील है, वहीं दूसरी तरफ अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपराओं से भी ही उतनी गहराई से जुड़ा है।

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अंतिम संपादन तिथि : मंगलवार, Oct 4 2016 12:17PM