झांसी-देवगढ़
"झांसी अद्भुत बुंदेलखंड के लिए प्रवेश द्वार है, जिसे अपनी वीरता और साहस के लिए जाना जाता है। झांसी पर प्रारंभ में चन्देल राजाओं का शासन था। 12 वीं सदी में वंश के पतन के बाद झांसी की महिमा कम हो गयी थी लेकिन 17 वीं शताब्दी में ओरछा के राजा बीर सिंह देव के शासनकाल में इसने फिर से अपनी पुरानी गरिमा को पा लिया।"
झलकारी बाई, गौस खान और अन्य लोगों के साथ झांसी की निडर स्वतंत्रता सेनानी रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 में अंग्रजों के खिलाफ मोर्चा खोल दी थी और मात्र 22 साल की उम्र में देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।। वह नेतृत्वशीलता और साहस का सशक्त उदाहरण थीं। उन्होंने 1000 महिलाओं की सेना तैयार की, उन्हें घुड़सवारी सिखाई और हथियार और गोला बारूद में प्रशिक्षित भी किया।

  • झांसी एक खूबसूरत शहर है जो यहां स्थित भव्य किले के कारण प्रसिद्व है।
  • आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिली शरण गुप्त, वृन्दावन लाल वर्मा, सियाराम शरण गुप्त और हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का आभामंडल भी इस शहर को मिला है।
  • फरवरी-मार्च में हर साल आयोजित झांसी महोत्सव में क्षेत्र की कला, शिल्प और संस्कृति का आनंद लेने का बेहतरीन अवसर है।

उ. प्र. पर्यटन से जुड़ें   #uptourism   #heritagearc
अंतिम संपादन तिथि : शनिवार, Jan 28 2017 3:16PM