मथुरा-वृंदावन
"मथुरा भगवान श्री कृष्ण का निवासस्थान है और हिन्दू समाज में इसका बड़ा धार्मिक महत्त्व है। यहाँ का इतिहास अत्यंत पुराना है। यहाँ तक कि महाग्रंथ रामायण में भी मथुरा का उल्लेख है। यह प्रमाणित है कि मथुरा कुषाण शासक कनिष्क (वर्ष 130 ईस्वी) की अनेक राजधानियों में एक था।"

आगरा से करीब एक घंटे की सड़क यात्रा करने के बाद यमुना के किनारे भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थल मथुरा स्थित है। इस पूरे क्षेत्र में भव्य मंदिर निर्मित हैं जो श्री कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं। मथुरा और वृंदावन के जुड़वा शहर, जहां श्री कृष्ण का जन्म और लालन पालन हुआ, आज भी उनकी लीला और उनकी जादुई बांसुरी की ध्वनि से गुंजित रहते हैं।

यहाँ के प्रमुख मंदिर है: गोविन्द देव मंदिर, रंगजी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिर यहाँ के प्रमुख मंदिरों में से हैं।

श्री कृष्ण के जीवन से जुड़े अन्य स्थान हैं गोकुल, बरसाना और गोवर्धन। गोकुल में श्री कृष्ण का पालन उनके मामा कंस की नजर से दूर चोरी छिपे किया गया था। श्री कृष्ण की सहचरी राधा बरसाना में रहती थीं, जहां आज भी होली के अवसर पर लट्ठमार होली धूम धाम से खेली जाती है। गोवर्धन में श्री कृष्ण ने स्थानीय निवासियों को वर्षा के देवता इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठा लिया था।

  • आगरा से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मथुरा और उससे थोड़ी ही दूर स्थित वृंदावन, पौराणिक ब्रज भूमि के जुड़वां शहर हैं।
  • बृज भूमि के आस-पास स्थित सभी स्थल एवं चिन्ह आपको धार्मिक यात्रा का आनंद देने में सक्षम है।
  • इन जुड़वां शहरों से जुड़ी हैं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं, सांस्कृतिक परंपराएं। यहां की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में भी ईश्वरीय उपस्थिति का एहसास होता है।
  • मंत्रमुग्ध कर देने वाले मंदिरों, बाग-बगीचों, गीत -संगीत, नृत्य और कला के बीच सामने आते भगवान कृष्ण से जुड़े रूपक पर्यटकों को भक्ति भाव से सराबोर करते हैं।
  • चरकुला नृत्य, रासलीला और लोक गीत-संगीत प्रेम और समर्पण का अद्भुत ताना-बाना बुनता है।
  • मथुरा संग्रहालय में सुरक्षित रखा ऐतिहासिक खजाना प्राचीन आलीशान दौर को देखने का मौका देता है।

उ. प्र. पर्यटन से जुड़ें   #uptourism   #heritagearc
अंतिम संपादन तिथि : सोमवार, Jan 23 2017 10:59AM