मेरठ-सरधाना

बाबा औघड़ नाथ मंदिर (काली पलटन मंदिर): मेरठ कैंट में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह कहा जाता है कि भारत की आजादी की पहली लड़ाई सन् 1857 में यहीं पर लड़ी गई थी, जिसके बाद यह चिंगारी आग में तब्दील हो गई। काली पलटन “ब्रिटिश आर्मी” के सैनिक, मंदिर परिसर के कुएं में पानी पीने आते थे। मंदिर के मुख्य पंडित द्वारा प्रतिबंधित कारतूस (जिसमे गाय का मांस मिला होने का आरोप था) के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया जिसने सैनिकों की हिंसक प्रतिक्रिया को उकसाया एवं जिसके परिणाम स्वरूप 10 मई, 1857 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे पहली इतनी बड़ी जंग छिड़ी।

शहीद स्मारक : शहीद स्मारक मेरठ जो भारत के शहीदों को समर्पित है, मुख्य रूप से उन्हे समर्पित है जो भारत की आजादी की 1857 की प्रथम लड़ाई का हिस्सा बने थे। यह स्मारक दिल्ली रोड पर लगभग सिटी रेलवे स्टेशन से नॉर्थ-ईस्ट से 6 किमी पर स्थित है एवं दिल्ली बस स्टेशन (भैसाली) से 200 मीटर पर स्थित है। शहीद स्मारक का कंपाउंड अच्छी तरह सुसज्जित एवं हरा-भरा है, जिसके परिसर में एक शहीद स्तंभ है, जो आजादी की लड़ाई के शहीदों को समर्पित है। शहीद स्मारक के कंपाउंड में राजकीय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 संग्रहालय स्थित है। संग्रहालय में तत्कालीन, दस्तावेजों का संग्रह है एवं भारत के 1857 की जंग के गौरवशाली अतीत के विभिन्न महत्वपूर्ण दृश्यों को चित्रकारी, रिलीफ एवं दियोरमा के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है। संग्रहालय में दो प्रमुख गैलरी 1 एवं 2 हैं।
गैलरी 1 में मेरठ की 1857 की घटनाओं का विवरण किया गया है, जिसमें फकीर (एक प्रमुख लीडर जिसने जंग में लोगों में एवं सैनिकों में जोश भरा था) के आने से अंग्रेजों के खिलाफ हुई जंग की शुरुआत का भी वर्णन है एवं इसके अतिरिक्त 1857 की प्रमुख घटनाओं का भी वर्णन है है। इनमें से कुछ लोग, बतौर सैनिक 18 अप्रैल, 1857 को उस विवादित कारतूस का इस्तेमाल करने से इंकार कर रहे थे, जिसमे मांस मिले होने की आशंका जताई गई थी।
गैलरी 2 में भी घूमने योग्य स्थान हैं, जिससे हमारे गौरवशाली अतीत का पता लगता है एवं भारत के 1857 की प्रथम आजादी की लड़ाई के शहीदों के साहस एवं उन्हे चित्रकारी के माध्यम से महसूस करने का भी मौका प्राप्त होता है। रानी लक्ष्मी बाई का चित्र (भारत में महिला शक्ति की अद्भुत मिसाल) सती चौरा घाट (कानपुर)। लखनऊ रेज़ीडेंसी, सिकंदर बाग एवं 1857 की अन्य प्रमुख घटनाएं।

शाहपीर का मक़बरा : 17वीं शताब्दी ए.डी. के आसपास लाल पत्थर से बना पवित्र स्ट्रक्चर, जिसे सूफी संत शाहपीर के मकबरे के नाम से जाना जाता है, यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र है। यहां पर हर साल श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं एवं उर्स के दौरान भारी मात्रा में आकर प्रार्थना करते हैं।

विक्टोरिया पार्क : इस स्थल का भारत की आजादी की 1857 की जंग में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां पर 875 सैनिकों को जेल में रखा गया था (जो उस समय यहां पर स्थित थी) क्योंकि उन्होंने उस विवादित कारतूस का इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया था। इसके अतिरिक्त 10 मई, 1857 को तीसरी नेटिव केवलरी के सैनिकों ने अपने 85 साथियों को छुड़ाने के लिए जेल को तोड़ा। उत्साही स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश सेटलमेंट पर आक्रमण किया, जो जेल के समीप ही स्थित थी एवं उनमे से बहुत लोगों की हत्या कर, सभी सेनानी दिल्ली की ओर चल पड़े (दिल्ली चलो)।

गांधी बाग: इस गार्डेन में बहुत ही खूबसूरत एवं बेहतरीन वातावरण रहता है। आमतौर पर उसे “कंपनी गार्डेन” के नाम से भी जाना जाता है। यह आजादी के पहले से मौजूद है, जिसके बाद इसका यह नाम रखा गया। इसमे शाम के समय एक म्यूजिकल फाउंटेन शो आयोजित किया जाता है। पार्क में एक छोटा वॉटर स्टोरेज चैंबर एवं मोटर भी स्थित है, जिसे दिल्ली के लाल किले से हटाकर यहां स्थापित किया गया है। इससे पूर्व, गार्डेन में बहुत से प्रवेश द्वार थे, इन प्रवेश द्वारों को हमेशा खुला रखा जाता था एवं इनमे किसी प्रकार का कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता था | लेकिन अब इसमे केवल एक प्रवेश द्वार ही खुला रहता है एवं निःशुल्क की जगह नाममात्र का शुल्क लगाया गया है।

हस्तिनापुर : हस्तिनापुर, जिला मेरठ से 37 किमी एवं दिल्ली से 100 किमी की दूरी पर स्थित है, जो मेरठ-बिजनौर रोड से जुड़ा हुआ है। यह स्थान राजसी भव्यता, शाही संघर्षों एवं महाभारत के पांडवों और कौरवों की रियासतों का सक्षात गवाह है। विदुर टीला, पांडेश्वर मंदिर, बारादरी, द्रोणादेश्वर मंदिर, कर्ण मंदिर, द्रौपदी घाट एवं कामा घाट आदि जैसे स्थल पूरे हस्तिनापुर में फैले हुए हैं। हस्तिनापुर जैन श्रद्धालुओं के लिए भी काफी प्रख्यात है। वास्तुकला के विभिन्न अद्भुत उदाहरण एवं जैन धर्म के विभिन्न मान्यताओं के केंद्र भी यहां पर भ्रमण योग्य हैं, जैसे जम्बुद्वीप जैन मंदिर, श्वेतांबर जैन मंदिर, प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर, अस्तपद जैन मंदिर एवं श्री कैलाश पर्वत जैन मंदिर आदि। जंबुद्वीप में सुमेरू पर्वत एवं कमल मंदिर  का  तो पूरा परिसर ही भ्रमण योग्य है, हस्तिनापुर सिख समुदायों के लिए भी एक बड़ी मान्यता का केंद्र है

 

जिला-मेरठ
सरधाना

सरधाना मेरठ के पश्चिम में लगभग 22 किमी पर स्थित है। यह एक भव्य शहर है, जिसका अतीत काफी ऐतिहासिक रहा है। इसकी स्थापना फ्रेंच एडवेंचरर वॉल्टर रेनहार्ड्ट, सनैरा नाम से भी प्रख्यात, द्वारा 18वीं शताब्दी में कराई गई थी । सनैरा सन् 1754 में ईस्ट इंडिया कंपनी के बतौर सैनिक भारत आए थे | सन् 1778 में इनकी मृत्यु के पश्चात, बेगम योहाना समरू, इनकी विधवा द्वारा गद्दी संभाली गई, जिन्होंने सरधाना में रोमन केथलिक चर्च की स्थापना कराई। भव्य चर्च, जिसे अब “श्राइन-बेसिलिका ऑफ आर लेडी ऑफ ग्रेसेज़”  के नाम से जाना जाता है, का निर्माण फरज़ाना बेगम, सरधाना की राजकुमारी द्वारा कराया गया था। इसका कार्य वर्ष 1809 में शुरु हुआ था एवं सन् 1822 में समाप्त हुआ था। उस समय इसकी लागत 04 लाख से भी अधिक थी | सन् 1924 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इस इमारत को संरक्षित घोषित कर दिया गया एवं 1961 में यह बेसिलिका के नाम से प्रचलित हो गया। सरधाना में गुजरन गेट पर शिव महादेव मंदिर एवं समरू महल भी कुछ महत्वपूर्ण स्थलों में से हैं।

 

जिला बागपत

पुरा महादेव या परशुरामेश्वर मंदिर मालिक जाटों का यह गाँव हिंडन नदी के किनारों पर एक पहाड़ी पर बसा हुआ है । यह मंदिर उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में स्थित है । यहाँ भगवान शिव को समर्पित एक अति  प्राचीन मंदिर है जहाँ साल में दो बार शिव भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर भगवान शिव के अभिषेक हेतु यहाँ तक पैदल यात्रा करके आते हैं । इस गाँव में भगवान शिव के इस मंदिर की तलहटी में श्रावण मास की चतुर्दश को ( अगस्त-सितंबर में लगभग) तथा फाल्गुन मास(फरवरी)  में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है ।  पुरा महादेव बलेनी नगर से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है, यह गाँव अच्छी तरह से सड़क मार्ग द्वारा  मेरठ (32 किमी) एवं बागपत (28 किमी) से जुड़ा हुआ है।

ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में परशुराम जी ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहाँ कड़ी तपस्या की थी तथा इस मंदिर में एक शिवलिंग  स्थापित किया था । भगवान शिव परशुराम की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके समक्ष  प्रकट हुए थे तथा उन्होनें परशुराम जी की दो इच्छाओं को पूर्ण भी किया था।  उसमें से पहली इच्छा यह थी कि परशुरामजी  की माताश्री जीवित हो जाएँ तथा दूसरी इच्छा संपूर्ण विश्व के कल्याण की थी । यह भी मान्यता है कि ऋषि परशुराम ने यहाँ एक शिव मंदिर स्थापित किया तथा इस स्थान को शिवपुरी नाम दिया जो कालांतर में शिवपुरा हो गया तथा और भी छोटा होकर आज “पुरा” गाँव के नाम से जाना जाता है । 

 

वाल्मीकि आश्रम एवं लव-कुश की जन्म स्थली बागपत शहर से लगभग 25 किमी की दूरी पर मेरठ शहर की ओर, मेरठ मार्ग पर हिंडन नदी के पास बलेनी (जनपद बागपत) में वाल्मीकि आश्रम स्थित है यहाँ पौराणिक कथा रामायण के अनुसार भगवान श्री राम के पुत्र लव-कुश जन्में तथा पले बढ़े थे।माना जाता है कि यह वही जगह है जहाँ माता सीता राम-रावण युद्ध के पश्चात निवास करने आईं थीं। यहाँ हर वर्ष लव-कुश का जन्मदिन आखातीज अर्थात अक्षय तृतीया के दिन मनाया जाता है ।

 

लाखामण्डल (लाक्षागृह) बरनावा उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में स्थित एक गाँव है । बरनावा मेरठ के निकट सरधाना एवं बिनौली के मध्य स्थित है । यह बिनौली से 3 किमी, मेरठ से 37 किमी तथा हस्तिनापुर से 77 किमी की दूरी पर स्थित है । महाभारत में बरवाना का उल्लेख वारणावत के नाम से किया गया है और यह लाक्षागृह का स्थान माना जाता है जहाँ महाभारत के अनुसार एक घटना घटी थी। महाभारत साहित्य के अनुसार, वारणावत (बरवाना) में, कौरवों नें पांडवों की हत्या करने की योजना बनाई थी । परंतु सुरंग की सहायता से पाण्डव हिंडन नदी के किनारों पर पहुँचने में सफल रहे जहाँ वे व्युदुर द्वारा भेजी गई नाव पर सवार होकर नदी पार कर गए ।

 

जिला-हापुड़
गढ़मुक्तेश्वर एवं बृज घाट

मेरठ से 47 किमी एवं गाजियाबाद से 70 किमी गढ़मुक्तेश्वर, धार्मिक स्थलों के लिए प्राचीन काल से ही काफी प्रचलित रहा है। गढ़मुक्तेश्वर का पुराना नाम शिव वल्लभपुर था। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव के भक्तों को यहीं पर मुक्ति प्राप्त हुई थी, जिस कारण इसे गढ़मुक्तेश्वर कहा जाने लगा। यहां पर नक्का कौन, जामा मस्जिद, मीराबाई की रेती एवं गंगा नदी स्थित हैं, जो प्रख्यात धार्मिक स्थलों में से एक है। पवित्र नदी गंगा के दाहिने तट के गढ़मुक्तेश्वर से पांच किमी पर बृजघाट स्थित है, जो दिल्ली-लखनऊ  नेशनल हाईवे पर स्थित है। बृजघाट, नए पवित्र तीर्थस्थल केंद्र एवं एक पिकनिक स्पॉट के तौर पर जाना जाने लगा। इसे उत्तर प्रदेश का हरिद्वार भी कहा जाता है। यहां बृजघाट में घाट पर भगवान की आरती भी की जाती है।

भाषा:- हिन्दी एवं अंग्रेजी
इंडस्ट्री:- खेल सामग्री, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, रेडीमेड कपड़े एवं स्पोर्ट के कपड़े, गजक (मिठाई) सिज़र।
एसटीडी कोड: 0121
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अंतिम नवीनीकृत तिथि : शुक्रवार, Nov 23 2018 12:48PM