पीलीभीत टाईगर रिजर्व

पीलीभीत टाईगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले, लखीमपुर खीरी जिले और बहराईच जिले में बना हुआ है। पीलीभीत टाईगर रिजर्व विविध और उत्पादक तेराई पारिस्थितिक तंत्र का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसकी विशेष प्रकार की पारिस्थितिकी को देखते हुए और बड़ी खुली जगह और सुरुचिपूर्ण शिकारियों की पर्याप्त पोषण को देखते हुए पीलीभीत टाईगर रिजर्व को सितंबर 2008 में स्थापित किया गया था। यह भारत का 45वां टाईगर रिजर्व प्रोजेक्ट है। रिजर्व का उत्तरी भाग भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ है, जबकि दक्षिण भाग शारदा और खखरा नदी से जुड़ा हुआ है। वाईल्डलाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया द्वारा किये गए अध्ययन के अनुसार दुधवा-पीलीभीत जनसंख्या में उच्च संरक्षण के गुण हैं, क्योंकि यह केवल बाघ की आबादी का प्रतिनिधित्व करती है, जो कि बाघ के पारिस्थितिक और व्यवहारिक रूपांतरों को दर्शाता है, और तराई क्षेत्र में अद्वितीय है। यह 127 से ज्यादा जानवरों, 326 पक्षियों की प्रजातियों और 2,100 पुष्पों के लिए एक बेहतर निवास है। यह उच्च सैल वन, वृक्षारोपण और कई जल निकायों के साथ घास के मैदानों का मोज़ेक है। यह जंगल बहुत से जंगली जानवरों जैसे लुप्तप्राय बाघ, दलदली हिरण, चीता आदि के लिए एक घर जैसा है। यहां मांसाहारी शिकार पर निर्भर हैं, जिसमें चेटल, जंगली सुअर, हॉग हिरण, दलहन हिरण आदि शामिल हैं। यहां पर पक्षियों का जीवन और संरक्षण काफी हद तक बेहतर है, जिसके चलते यहां पर तमाम पक्षियों की प्रजाती को देखा जा सकता है। चुका इंटरप्रिटेशन जोन के साथ नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, कॉटेज और जल निकायों की किनारे, पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध और लोकप्रिय है।

पक्षी

भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 1300 प्रजातियों के पक्षी देखे जाते हैं, जिनमें से 326 प्रजातियां पीलीभीत टाईगर रिजर्व में देखी जा सकती हैं, जिनमें लाल जंगली मुर्गी, हॉर्नबिल, पी फाउल, फिश ईगल, ब्लैक नेक स्टोर्क, वूली नेक स्टोर्क, ड्रोंगो, नाईट जार, ग्रीन पिजन, स्पॉटड आउल, जंगल बाब्लर, ब्लैक फ्रैंकोलिन, फिश आउल, आदि शामिल है।

पशु

कभी-कभी असामान्य रूप से शांत जंगल चितले हिरण या लंगूर की आवाज से गूंज उठता है। इस आवाज से यहां रह रहे सभी जानवरों को “शेर” की मौजूदगी का संकेत मिल जाता है, एक मायावी जानवर की उपस्थिति जो पग के निशान और खरोंच द्वारा महसूस की जा सकता है। जब इस प्राकृतिक पशु को अपने प्राकृतिक परिवेश में देखा जाता है तो वह हमेशा के लिए यादगार क्षण बन जाता है। इसके अतिरिक्त जानवरों की अन्य प्रजातियां जैसे तेंदुआ, भालू, जंगली सुअर, दलदली हिरण, चित्तीदार हिरण, हॉग हिरण, भौंकने वाला हिरण, अजगर, छिपकली आदि भी पीलीभीत टाईगर रिजर्व में पायी जाती हैं और इसकी पारिस्थितिकी में समानान्तर भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त यहां बहुत से लुप्तप्राय प्रजातियां जैसे कि ओटर, पैंगोलिन, बंगाल फ्लोरिसन, भारतीय गिद्ध भी यहां पर देखने को मिलते हैं।

उ. प्र. पर्यटन से जुड़ें   #uptourism   #heritagearc
अंतिम नवीनीकृत तिथि : गुरुवार, Jun 1 2017 3:57PM